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एक इंजीनियर के भरोसे 22 वार्ड, विकास कार्यों पर लगा ग्रहण

तिल्दा-नेवरा नगर पालिका की लचर व्यवस्था

प्रदेश की 10 सबसे बड़ी नगर पालिकाओं में शुमार तिल्दा-नेवरा इन दिनों भारी प्रशासनिक कुप्रबंधन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता का दंश झेल रही है। औद्योगिक हब होने के बावजूद नगर की व्यवस्था एक ऐसे उप-अभियंता के भरोसे है, जो मुख्यालय से नदारद रहकर रायपुर से अपनी ‘सुविधाजनक’ ड्यूटी बजा रहा है। आलम यह है कि शहर की बुनियादी सुविधाएं—साफ-सफाई, पेयजल आपूर्ति और अतिक्रमण विरोधी अभियान—पूरी तरह चरमरा गई हैं, और नगर पालिका का अमला लाचार दिखाई दे रहा है।

स्वीकृत पदों पर नहीं नियुक्ति, जनता का भविष्य अधर में :

नगर पालिका के नियमानुसार, तिल्दा-नेवरा में कार्यों की सुचारू मॉनिटरिंग के लिए एक सहायक अभियंता (AE) और दो उप-अभियंताओं के पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में सहायक अभियंता का पद रिक्त है और दो उप-अभियंता पदों में से एक खाली पड़ा है। इकलौते पदस्थ उप-अभियंता शिवाजी जाधव के कार्यभार पर शहर का पूरा ढांचा टिका है।

सरकारी नियमावली के अनुसार, उप-अभियंता का अपने पदस्थापना स्थल पर निवास करना अनिवार्य है ताकि वह हर समय उपलब्ध रहे। इसके विपरीत, शिवाजी जाधव सप्ताह में मात्र एक या दो दिन ही तिल्दा पहुंचते हैं। शेष समय वे रायपुर स्थित अपने आवास पर व्यतीत करते हैं।

‘हेडक्वार्टर में बुलाने के निर्देश दिए हैं’

जब इस संबंध में मुख्य नगरपालिक अधिकारी (CMO) से बात की गई, तो उन्होंने अपनी विवशता जाहिर करते हुए कहा, “मुझे यहां आए अभी एक महीना ही हुआ है। मैंने इंजीनियर को स्पष्ट निर्देश दे दिए हैं कि वे तिल्दा शिफ्ट हों या फिर मुख्यालय में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करें।”

 

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