
रायपुर: छत्तीसगढ़ में विभिन्न सरकारी और निजी क्षेत्रों में काम कर रही ठेका कंपनियों (Contract Companies) पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, इन कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी भारी मानसिक और आर्थिक दबाव में हैं।वेतन में अनिश्चितता और शोषणकर्मचारियों का आरोप है कि ठेका कंपनियां न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wage) के नियमों का उल्लंघन कर रही हैं।फिक्स सैलरी का अभाव: श्रमिकों को मिलने वाली सैलरी का कोई निश्चित आधार नहीं है। अलग-अलग महीनों में बिना किसी कारण के वेतन काट लिया जाता है।ओवरटाइम का भुगतान नहीं: कई मामलों में कर्मचारियों से निर्धारित 8 घंटे से ज्यादा काम लिया जा रहा है, लेकिन उन्हें अतिरिक्त समय (Overtime) का कोई भुगतान नहीं किया जा रहा है।हक मांगने पर नौकरी से निकालने की धमकीसबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जब कोई कर्मचारी अपने अधिकारों या तय वेतन की मांग करता है, तो उसे सीधे तौर पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। कर्मचारियों का कहना है कि प्रबंधन द्वारा उन्हें डराया-धमकाया जाता है, जिससे वे शिकायत करने से भी कतराते हैं।”हमें यह भी नहीं पता होता कि इस महीने हाथ में कितने पैसे आएंगे। अगर हम सवाल करते हैं, तो कहा जाता है कि कल से काम पर मत आना।” – एक पीड़ित कर्मचारी (नाम परिवर्तित)नियमों की अनदेखीस्थानीय स्तर पर उठ रही मांगों के बावजूद, श्रम विभाग के नियमों को ताक पर रखकर ये कंपनियां मनमानी कर रही हैं।PF और ESI की कटौती: कई कर्मचारियों ने शिकायत की है कि उनके वेतन से PF का पैसा तो कटता है, लेकिन उनके खातों में जमा नहीं होता।सुरक्षा मानकों का अभाव: जोखिम भरे कार्यों में लगे श्रमिकों को सुरक्षा उपकरण (Safety Gear) तक मुहैया नहीं कराए जा रहे हैं।क्या कहती है कानूनी स्थिति?छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पूर्व में कई फैसलों में यह स्पष्ट किया है कि ‘मॉडल एम्प्लॉयर’ (Model Employer) के रूप में सरकार और उससे जुड़ी संस्थाओं को कर्मचारियों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार करना चाहिए। ठेका प्रथा के नाम पर किसी भी कर्मचारी का आर्थिक शोषण करना श्रम कानूनों का उल्लंघन है।प्रशासन से मांगश्रमिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार और श्रम विभाग से इन कंपनियों के खिलाफ कठोर ऑडिट की मांग की है। मांग की जा रही है कि:सभी ठेका कर्मचारियों का वेतन सीधे उनके बैंक खाते में आए।वेतन पर्ची (Salary Slip) अनिवार्य रूप से दी जाए।धमकाने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए।
