
कोरबा।जिला आयुष विभाग में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने विभागीय कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार डिंगापुर स्थित आयुष विभाग के पॉली क्लीनिक में रसोइया (कुक) के पद में पदस्थ ईश्वर महेश ने आधिकारिक तौर पर एक वर्ष का अवकाश लिया हुआ है, लेकिन इसके बावजूद वह लगातार आयुष विभाग के मुख्य कार्यालय की आवक-जावक (डाक) शाखा में कार्य करते दिखाई देते हैं।
जिला आयुष कार्यालय मौजूद ईश्वर महेश
सूत्रों का दावा है कि संबंधित कर्मचारी लंबे समय से कार्यालयीन कार्यों का संचालन कर रहें हैं, जबकि रिकॉर्ड में वह अवकाश पर बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब कर्मचारी छुट्टी पर है तो उसे कार्यालय में काम करने की अनुमति किसने दी? यदि वह नियमित रूप से कार्यालय आ रहें हैं तो उसके अवकाश का क्या औचित्य है?
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब विभागीय कर्मचारियों के बीच इस व्यवस्था को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। कर्मचारियों का कहना है कि नियमों के विपरीत किसी कर्मचारी का अवकाश अवधि में कार्यालयीन कार्य करना गंभीर प्रशासनिक अनियमितता की श्रेणी में आता है।
जानकारों का मानना है कि यदि आरोप सही हैं तो यह केवल नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि विभागीय मिलीभगत और संरक्षण का भी संकेत हो सकता है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर किस अधिकारी के संरक्षण में यह पूरा खेल चल रहा है?
विभागीय सूत्रों के अनुसार मामले की निष्पक्ष जांच होने पर कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। इस संबंध में प्रभारी जिला आयुष अधिकारी डॉ.बसंत कुमार नोरगे ने बताया कि रसोइया ईश्वर महेश एक वर्ष के लिए शैक्षणिक अवकाश लिया हुआ है लेकिन स्टाफ की कमी की वजह से उन्हें बुलाकर कार्य में सहयोग लिया जाता है!अब बड़ा सवाल ये भी है कि ईश्वर शैक्षणिक अवकाश पर हैं तो फिर शिक्षा ग्रहण के लिए महाविद्यालय न जाकर आयुष विभाग कार्यालय के डाक शाखा में कार्य संपादन कैसे कर रहें हैं,वो जिस भी महाविद्यालय में उच्च शिक्षा के लिए प्रवेश लिए हैं वहां उपस्थिति कैसे दर्ज होता होगा ……ये तो आगे पता चलेगा…लेकिन..
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आयुष विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं ? क्या जिला कलेक्टर भी इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेकर कोई कार्यवाही करेंगे या ..?
