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कोरबा में बिना काम किए ₹44 लाख डकारने वाले पूर्व सरपंच और ठेकेदार भेजे गए जेल

सरकारी राशि का दुरुपयोग करने और विकास कार्यों के नाम पर बंदरबांट करने वालों के खिलाफ कोरबा जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है।

कोरबा (छत्तीसगढ़)। सरकारी राशि का दुरुपयोग करने और विकास कार्यों के नाम पर बंदरबांट करने वालों के खिलाफ कोरबा जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर कुणाल दुदावत के कड़े निर्देशन में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं विहित प्राधिकारी पाली द्वारा ग्राम पंचायत माखनपुर में हुए वित्तीय भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। तत्कालीन सरपंच और ठेकेदार के खिलाफ राशि वसूली का आदेश जारी करते हुए दोनों को सिविल जेल भेज दिया गया है।

बिना काम शुरू किए आहरित कर ली लाखों की राशि

पूरा मामला वर्ष 2023 का है, जब ग्राम पंचायत माखनपुर में विभिन्न शैक्षणिक अधोसंरचना कार्यों के लिए लाखों रुपए स्वीकृत किए गए थे। इसमें स्वामी आत्मानंद स्कूल माखनपुर में कंप्यूटर कक्ष एवं पुस्तकालय निर्माण हेतु स्वीकृत ₹49,99,000 में से ₹19,99,600 आहरित किए गए। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय माखनपुर में शौचालय निर्माण हेतु स्वीकृत ₹25,45,000 में से ₹10,18,000 निकाले गए और स्वामी आत्मानंद विद्यालय में नवीन भवन विस्तार कार्य हेतु स्वीकृत ₹36,20,000 में से ₹14,48,000 की राशि आहरित कर ली गई। जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इतनी बड़ी रकम निकालने के बावजूद धरातल पर (कार्य स्थल पर) निर्माण कार्य शुरू तक नहीं किया गया था।

जांच में दोषी पाए जाने पर एसडीएम की सख्त कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम पाली द्वारा छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 92 के तहत प्रकरण दर्ज कर विस्तृत जांच की गई। सुनवाई के दौरान तत्कालीन सरपंच मनोज कुमार पोर्ते, तत्कालीन व ठेकेदार मुजम्मिल अली रिजवी के विरुद्ध शासकीय राशि के दुरुपयोग के पुख्ता प्रमाण पाए गए।

प्रशासन की सख्त कार्रवाई से मचा हड़कंप

प्रशासन द्वारा कुल ₹44,65,600 की वसूली योग्य राशि निर्धारित की गई है। इसके तहत एक तिहाई यानी ₹14,88,533 की राशि संबंधितों के वेतन एवं अन्य भत्तों से वसूलने के आदेश दिए गए हैं। इसके साथ ही एसडीएम पाली द्वारा जारी आदेश के बाद तत्कालीन सरपंच मनोज कुमार पोर्ते और ठेकेदार मुजम्मिल अली रिजवी को हिरासत में लेकर 25 मई से 27 मई तक की अवधि के लिए सिविल जेल भेज दिया गया है। साथ ही तत्कालीन सचिव धीरसाय से पूछताछ जारी है। वहीं प्रशासन की इस कार्रवाई से क्षेत्र के भ्रष्ट तत्वों में हड़कंप मच गया है।

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