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गुजरात में 166 बांग्लादेशी पकड़ाए, मजदूर बनकर आए; फर्जी दस्तावेज बनवाए

केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 28 मई 2026 को गांधीनगर के सोनिपुर में एक सभा के अंतर्गत कहा था कि देशभर से एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुनकर बाहर निकाला जाएगा. गुजरात पुलिस उनके कहे हुए बात को चरितार्थ करने में लगा हुआ है. 2 जून को गुजरातभर में बांग्लादेशियों को पकड़ने के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया. अभियान में अहमदाबाद पुलिस और क्राइम ब्रांच ने 300 से ज्यादा संदिग्धों को हिरासत में लेकर जांच शुरू की तो 166 बांग्लादेशी पाए गए हैं, जबकि बकियों से पूछताछ के साथ उनके डॉक्यूमेंट की भी जांच की जा रही है.

अहमदाबाद पुलिस और क्राइम ब्रांच ने यह रेड चंडोला, गुलाबनगर और खोडियारनगर क्षेत्रों में चलाया है. सभी हिरासत में लिए गए लोगों को क्राइम ब्रांच कैंपस में रखा गया है.

गुजरात के अहमदाबाद में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ चलाए गए अभियान में और भी बड़े बड़े खुलासे हुए है. सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि कई लोगों के पास से आधार कार्ड समेत भारतीय पहचान संबंधी दस्तावेज भी बरामद हुए हैं.

क्राइम ब्रांच जेसीपी शरद सिंघल के अनुसार कुछ स्पा सेंटरों में बांग्लादेशी लड़कियां काम कर रही थीं. पुलिस की रेड पड़ते ही पहले स्पा मैनेजर फरार हो गया और स्पा सेंटर को बाहर से ताला लगा गया. फंसी लड़कियों को दरवाजा तोड़कर निकालने के क्रम में कुछ स्थानीय लोगों की मदद से लड़कियां खिड़कियों से कूदकर फरार हो गईं है, और उनमे से कुछ लड़कियों को हिरासत में लिया गया है. उनसे आगे की पूछताछ जारी है.

जांच में 166 बांग्लादेशी पाए गए लोगों में अभी तक 41 पुरुष, 95 महिलाएं और 30 बच्चे शामिल हैं. ये सभी पहचान बदलकर शहर के अलग-अलग इलाकों में किराए के मकानों, झुग्गी-झोपड़ियों, होटलों, कामगार आवासों और व्यावसायिक स्थानों में रह रहे हैं। कुछ बांग्लादेशियों ने पूछताछ में बताया कि यहां पर कमाए गए पैसे नगद रूप में दलाल के माध्यम से पहले कोलकाता फिर उसके बाद वहां से बांग्लादेश पहुंचते थे. कुछ मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए भी पैसे भेजे जा रहे थे.

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