
बीजापुर/बस्तर: छत्तीसगढ़ के नक्सल मोर्चे पर सुरक्षाबलों को एक बड़ी ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। बीजापुर जिले में 25 सक्रिय नक्सलियों ने 93 आधुनिक हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। आत्मसमर्पित नक्सलियों की निशानदेही पर पुलिस ने बस्तर के अब तक के सबसे बड़े ‘नक्सल डंप’ का भंडाफोड़ किया है, जिसमें करोड़ों रुपये की नकदी और भारी मात्रा में सोना बरामद हुआ है।विकास की ओर बढ़ते कदमयह कार्रवाई केवल सैन्य सफलता नहीं, बल्कि उस हिंसक विचारधारा की हार मानी जा रही है जिसने दशकों तक बस्तर को विकास से दूर रखा। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, यह उपलब्धि राज्य और केंद्र की ‘डबल इंजन’ सरकार की निर्णायक नीतियों का परिणाम है।50 साल बनाम 12 साल: बदला बस्तर का चेहराविशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जो बदलाव पिछले 50 वर्षों में नहीं देखा गया, वह बीते 12 वर्षों में धरातल पर नजर आने लगा है। बस्तर, जो कभी ‘रेड कॉरिडोर’ के नाम से जाना जाता था, अब तेजी से ‘डेवलपमेंट कॉरिडोर’ में बदल रहा है।”आज बस्तर में बंदूकें खामोश हो रही हैं और विकास की गूंज सुनाई दे रही है। अब यहाँ की दिशा हथियार नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचा तय कर रहा है।”मुख्य आकर्षण:हथियारों का जखीरा: 93 हथियारों के साथ नक्सलियों का समर्पण बल के बढ़ते दबाव और शासन के प्रति भरोसे को दर्शाता है।अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी: बरामद करोड़ों की नकदी और सोना नक्सलियों की आर्थिक कमर टूटने का संकेत है।नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़: सोशल मीडिया पर #NaxalFreeChhattisgarh के साथ लोग इस निर्णायक प्रहार की सराहना कर रहे हैं।सुरक्षा बलों का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा जब तक बस्तर पूरी तरह से हिंसा मुक्त नहीं हो जाता। अब वह दिन दूर नहीं जब बस्तर की पहचान केवल उसकी प्राकृतिक सुंदरता और शांतिपूर्ण संस्कृति से होगी।
