
छत्तीसगढ़ के पोल्ट्री और चिकन व्यापारी वर्तमान में एक गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। बर्ड फ्लू की खबरों और अफवाहों के बीच बाजार में चिकन की मांग में भारी गिरावट आई है, जिससे व्यापारियों को भारी वित्तीय घाटा उठाना पड़ रहा है।प्रमुख बिंदु:भारी वित्तीय घाटा: व्यापारियों का दावा है कि मांग घटने और कीमतों के गिरने से पोल्ट्री उद्योग को प्रतिदिन लगभग ₹2 करोड़ का नुकसान हो रहा है।मांग में गिरावट: बर्ड फ्लू के डर से उपभोक्ताओं ने चिकन और अंडों से दूरी बना ली है, जिसके कारण रिटेल और होलसेल दोनों बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है।लागत निकालना मुश्किल: मुर्गियों के दाने और रखरखाव का खर्च लगातार बढ़ रहा है, जबकि बिक्री न होने से छोटे और मध्यम वर्ग के पोल्ट्री फार्म संचालक कर्ज की स्थिति में आ गए हैं।व्यापारियों की मांग: संकट को देखते हुए पोल्ट्री एसोसिएशन और व्यापारियों ने सरकार से इस दिशा में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने और राहत पैकेज की उम्मीद जताई है।स्थिति का विश्लेषण:पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि जब भी बर्ड फ्लू की खबरें आती हैं, बिना किसी वैज्ञानिक पुष्टि के भी लोग पैनिक करने लगते हैं। इससे न केवल व्यापारी, बल्कि इस क्षेत्र में काम करने वाले हजारों मजदूर भी प्रभावित हो रहे हैं।वर्तमान में, व्यापारी शासन-प्रशासन से इस भ्रांति को दूर करने और बाजार को फिर से पटरी पर लाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
