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कोरबा। जिले के मदवारानी जंगल में बीते दो वर्षों से पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। हालात यह हैं कि जंगल क्षेत्र में वन्य जीवों और स्थानीय लोगों के लिए पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो सकी है, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

कोरबा। जिले के मदवारानी जंगल में बीते दो वर्षों से पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। हालात यह हैं कि जंगल क्षेत्र में वन्य जीवों और स्थानीय लोगों के लिए पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो सकी है, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।मिली जानकारी के अनुसार, जंगल में जलस्रोत सूख चुके हैं और नए जल प्रबंधन के लिए कोई प्रभावी पहल नहीं की गई। गर्मी के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब जानवरों को पानी के लिए भटकना पड़ता है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कई बार इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।बताया जा रहा है कि वन विभाग द्वारा पानी की व्यवस्था के लिए टैंकर या कृत्रिम जलस्रोत बनाने जैसे उपाय भी नियमित रूप से नहीं किए जा रहे हैं। इससे न केवल वन्यजीवों के जीवन पर खतरा बढ़ रहा है, बल्कि जंगल के पर्यावरणीय संतुलन पर भी असर पड़ रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में जलस्रोतों का संरक्षण और समय-समय पर पुनर्भरण (रिचार्ज) जरूरी होता है। लगातार उपेक्षा के कारण ऐसे हालात उत्पन्न होते हैं, जिससे जैव विविधता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।फिलहाल, क्षेत्र के लोग और पर्यावरण प्रेमी प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर स्थायी जल व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं, ताकि जंगल और वन्यजीवों को राहत मिल सके।

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