
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भारतमाला परियोजना से जुड़ा एक बड़ा मुआवजा घोटाला सामने आया है। इस मामले में आरोप है कि करोड़ों रुपये का मुआवजा रिश्तेदारों और परिचितों के नाम पर फर्जी तरीके से लिया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, जमीन अधिग्रहण के दौरान सरकारी अधिकारियों, बिचौलियों और निजी लोगों की मिलीभगत से जमीन रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया। अधिसूचना जारी होने के बाद भी जमीन के स्वामित्व में बदलाव दिखाकर और खसरा रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर मुआवजे की राशि कई गुना बढ़ाई गई।
मामले में यह भी सामने आया है कि एक ही जमीन को कागजों में छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग लोगों, खासकर रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों के नाम पर मुआवजा क्लेम किया गया। इस तरीके से सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया और आरोपियों को अवैध लाभ मिला।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि जमीन मालिकों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर मुआवजा राशि जमा की गई, जिसके बाद पहले से लिए गए हस्ताक्षरित दस्तावेजों के जरिए रकम को अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। असली जमीन मालिकों को बहुत कम हिस्सा मिला।
बताया जा रहा है कि यह घोटाला रायपुर-विशाखापत्तनम आर्थिक कॉरिडोर के तहत भूमि अधिग्रहण से जुड़ा है और इसमें सैकड़ों करोड़ रुपये तक की गड़बड़ी की आशंका जताई गई है।
फिलहाल, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) द्वारा मामले की जांच जारी है। कई स्थानों पर छापेमारी की गई है और दस्तावेजों की जांच के बाद आने वाले समय में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
