रायपुर: छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने अवैध धर्मांतरण के खिलाफ एक कड़ा कदम उठाते हुए विधानसभा में “छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026” को सफलतापूर्वक पारित कर दिया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस कानून को राज्य की सांस्कृतिक अखंडता की रक्षा के लिए ऐतिहासिक बताया है।
मुख्यमंत्री का कड़ा संदेशविधेयक पारित होने के बाद माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धर्मांतरण हमारे प्रदेश के माथे पर एक कलंक की तरह है, जिसे समाप्त करना शासन की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा:”आज का दिन छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक है। यह विधेयक उन लोगों के मंसूबों पर पानी फेरेगा जो हमारी भोली-भाली जनता की गरीबी, अज्ञानता और लाचारी का फायदा उठाकर प्रलोभन या दबाव के जरिए धर्मांतरण कराते थे।”विधेयक की मुख्य विशेषताएं और कड़े प्रावधानयह नया कानून पुराने 1968 के अधिनियम का स्थान लेगा और इसमें बेहद सख्त सजा के प्रावधान शामिल किए गए हैं:आजीवन कारावास की सजा: सामूहिक धर्मांतरण (दो या दो से अधिक व्यक्ति) के मामलों में दोषियों को 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और न्यूनतम 25 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।नाबालिगों और महिलाओं के लिए विशेष सुरक्षा: यदि पीड़ित नाबालिग, महिला या SC/ST वर्ग से है, तो सजा 10 से 20 वर्ष तक हो सकती है।डिजिटल माध्यमों पर भी नजर: पहली बार इस कानून के दायरे में सोशल मीडिया और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से किए जाने वाले धर्मांतरण को भी शामिल किया गया है।कलेक्टर को सूचना देना अनिवार्य: अब स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट (DM) को घोषणा पत्र देना होगा।
घर वापसी अपराध नहीं: विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि अपने पूर्वजों के मूल धर्म में वापस लौटना धर्मांतरण की श्रेणी में नहीं आएगा।न्याय के लिए विशेष अदालतेंमुख्यमंत्री ने घोषणा की कि इन मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का गठन किया जाएगा, ताकि पीड़ितों को 6 महीने के भीतर न्याय मिल सके। साथ ही, अवैध धर्मांतरण के पीड़ितों को शासन की ओर से 10 लाख रुपये तक के मुआवजे का भी प्रावधान किया गया है
छत्तीसगढ़ शासन का यह कदम राज्य में जबरन और लालच देकर कराए जा रहे मतांतरण पर पूर्ण विराम लगाने की दिशा में एक निर्णायक प्रहार माना जा रहा है।ब्यूरो रिपोर्ट, छत्तीसगढ़ शासन
